हर साँस में प्रभु नाम रहे,
हर धड़कन तेरा ध्यान।
रोम-रोम में तू ही तू हो,
तू ही मेरी पहचान॥
जग के मेले छूटें सारे,
छूटे मोह-माया।
प्रभु-नाम-दीप जले तो,
मन-मंदिर मुस्काया॥
श्वास चले तो नाम चले,
मौन बने जब वाणी।
नाम-सुमिरन से जाग उठे,
अंतर की अमर कहानी॥
दुःख की धूप सताए जब,
नाम बने सुखधाम।
डगमग मन को राह दिखाए,
तेरा पावन नाम॥
नाम-सुधा की बूँद पिए,
मिटे जन्म-जन्म की प्यास।
बिखरा मन निज में लौटे,
जागे अंतर-प्रकाश॥
न धन माँगूँ, न यश माँगूँ,
न माँगूँ जग का मान।
अंतिम श्वास तलक बस तेरा,
नाम रहे मेरे प्राण॥
हर साँस में तेरा नाम रहे,
हर धड़कन तेरा ध्यान।
नाम-सुमिरन में मिट जाऊँ,
नाम बने मेरी पहचान॥
- सनातन मुकुंद
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