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भारती-स्तुतिः

                
                                                         
                            ऋषिभिस्तपसा ज्ञाता वेदोद्भूता सनातनी।
                                                                 
                            
पुण्यभूमिर्जगद्गुरुः सर्वदा जयति स्वयम्॥ १॥

ऋग्यजुःसामाथर्वाख्या वेदाः श्रुतिपरायणाः।
यज्ञपावनचरित्रा भारती धर्मधारिणी॥ २॥

वाल्मीकिर्व्यासपाणिनिपतञ्जल्यादयो बुधाः।
भारत्यां सम्भवाः सर्वे ज्ञानदीपप्रकाशकाः॥ ३॥

उपनिषत्प्रदीपा सा गीतामृतप्रकाशिनी।
धर्मार्थकाममोक्षाणां दात्री मे भारती सदा॥ ४॥

अहिंसासत्यदानाद्यैः संस्कारैः समलङ्कृता।
नित्यं विभाति पुण्या सा भारती मम मातृका॥ ५॥

न भूमिरेषा केवलं न राज्यमिदमेव च।
संस्कारधर्मधात्री सा भारती मे विराजते॥ ६॥
- सनातन मुकुंद
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9 घंटे पहले

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