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आगे की बात करो

                
                                                         
                            जो गुज़र गया वो गुज़र गया, आगे की बात करो
                                                                 
                            
पतझड़ की बातें छोड़ो, नव वसंत की बात करो
इन संतापों में क्या रखा है, कुछ तो दिल से सोचो
जीवन नहीं दुबारा मिलता, खुश रहने की बात करो
क्यों हर वक़्त सोचते रहते हो ये नफरत की बातें
छोड़ छाड़ ये कपट की भाषा सच्ची सच्ची बात करो
क्यों कर जलते रहते हो औरों की खुशियां देख देख
खुद भी खुशियां ढूंढो और मिलकर रहने की बात करो
है 'मिश्र' फितरती ये दुनिया ज़रा बच के रहना इससे
ना बीच में कूदो नायक बन बस मतलब की बात करो
-शांती स्वरूप मिश्र
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2 घंटे पहले

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