आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

भारत चाँद पर छाया है

                
                                                         
                            माना के तू चाँद है
                                                                 
                            
भारत में सोमनाथ सिवान है
विक्रम राह से भटका था
तू तनिक हाथ से छिटका था

ऑर्बिटर से घिरा है तू
कैसा सरफिरा है तू ?
विक्रम फिर से जुड़ जायेगा
तू कहीं और ना मुड़ पायेगा

हमने हाथ बढ़ाया है
तेरा भी मान बढ़ाया है
मत सोलह कलायें हमें दिखा
इनको हमनें ही खोजा सीखा

ऋषि दक्ष गौतम को
क्या तू गया है भूल ?
याद है दामन जमीं वो कालिख धूल
जो अक्षों को भूलता है
सदा भँवर में झूलता है

हम मामा तुझे बुलाते है
मान मिठाई खिलाते है
तब तक व्रत ना खोलेंगे
तेरे आँगन में ना डोलेंगे

ना तू हमकों आँख दिखा
ये हमनें भी खूब सीखा
आँख घूमा लाता ज्वार
आँख घूमा भाटा उतार

टेढ़ी नजर से ज्वार उठा
सारे भारत पर दुख टूटा
स्वागत सत्कार की कर ले तैयारी
उतरेगी चाँद पर भारत सवारी

इसरो भारत की धड़कन है
ये स्वाभिमान का दर्पण है
इसरो छलाँग लगाता है
अंतर्ग्रहों तक जाता है

हमें कोई ना रोक पाएगा
भारत चाँद पर छाएगा
तू अब ना आँख दिखाएगा
भारत चाँद पर छायेगा...

कोटि आँखें क्षण झपकी ना चार साल
आज दुनिया मिला रही ताल से ताल
तुझे नापने का हमनें वचन निभाया है
मामा देख! आज भारत चाँद पर छाया है
देखो भारत चाँद पर छाया है।
-शांतिलाल सोनी
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर