मैं न लूँ नाम किसी का,
पर तुम समझदार हो भाई।
वे पाँच दिन विदेश क्या गए
पीछे किसने कैसी हवा उड़ाई!!”
जहाँ देखो वहाँ कोकरोच,
हर मोबाइल में कोकरोच।
रील खोलो तो कोकरोच,
मीम खोलो तो कोकरोच।।
मज़ाक-मज़ाक में कुछ खेल हुआ।
सिस्टम से सिस्टम का मेल हुआ।
कोकरोचों ने ऐसा जोर लगाया।
पार्टियों ने खुद को पीछे पाया।।
फॉलोअर्स की दौड़ में भाई,
सबने हालत पतली पाई।
दो करोड़ का आँकड़ा पार,
दस करोड़ नहीं है दूर यार।।
इंस्टाग्राम पर पार्टी आई,
नाम सुनो तो हँसी भी आई,
“कोकरोच जनता पार्टी” साईं,
यानी “सी-जे-पी” कहलवाई।।
मेरा तो सुझाव यही था,
नाम थोड़ा यह भी सही था–
“कोकरोच जनता ऑफ इंडिया”,
यानि “सी-जे-आई” फीट था!
यदि चार लोग कहीं बैठ जाएँ,
सिस्टम पर चार बात सुनाएँ,
लोग तुरंत उँगली उठाते,
“देशद्रोही हैं!” चिल्लाते।।
लेकिन जब दो करोड़ जुटे,
मीम बनाते, पोस्टें कूटे,
इतनी भीड़ को देखकर फिर,
कौन भला रहता चुप स्थिर?
किसी ने बोला ,“विदेशी हैं!”
किसी ने कहा, “सब फेक हैं!”
किसी ने बोला, “पाकिस्तानी!”
हर बार फिर वही निदानी।।
देश में चाहे कुछो भेल,
पाकिस्तान को बीच में लाओ।
ध्यान भटकाने का खेल,
टीवी पर पुराना डिवेट चलाओ।।
और अगर पाकिस्तान से भी
कुछ युवा फॉलो कर लें कभी,
तो इसमें इतना घबराना कैसा?
दर्द बेरोज़गारी का तो एक जैसा।।
अरे भाई, सफाई की क्या दरकार?
असलियत सबको पता है, सरकार।
जो आरोप लगा रहे दिन-रात,
उनको भी मालूम है सारी बात।।
लेकिन मामला उल्टा चलता।
जो प्रश्न करे वही है खलता।
समस्या कम, प्रचार तगड़ा है।
यही आज का असली झगड़ा है।।
कुल मिलाकर हाल यह भाई,
जनता की बेचैनी बाहर आई।
'सीजेपी' को मज़ाक न समझो।
इसमें छिपे सवालों को परखो।।
आज कहूं यह सुन ले सत्ता।
मीमों में भी छुपी है 'व्यथा'।
युवा हँसते-हँसते जब रोते हैं,
“कोकरोच आंदोलन” होते हैं।।
अब पूरा जोर इसी बात पर है,
यह अभियान कैसे रोका जाए।
क्या पोस्ट पे पोस्टें डाली जाएँ,
या ध्यान कहीं भटकाया जाए।।
कहीं बिहार को बीच में लाओ,
कहीं कोई नया मुद्दा चमकाओ।
कहीं राष्ट्रवाद का ढोल बजाओ,
कहीं विरोधियों को डरवाओ।।
वैसे विश्वगुरु चाह ले तो भाई,
सब कुछ मिनटों में हो जाए।
बस एक कॉल की तो देर है,
पूरा सिस्टम तीतर बटेर है।।
-हैलो कैसे हो मार्क हमारे?
लिंक एक भेज रहा हूँ प्यारे।
“न-न, वो पत्रकार वाला नहीं,
वो तो पहले ही निपटाए रही।।
“यह नया लिंक है, ध्यान लगाना,
और इसका भी कुछ कर जाना।”
-शम्भु प्रसाद
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