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सिन्दूर का कर्ज अभी बाकी

                
                                                         
                            सिन्दूर का कर्ज अभी बाकी
                                                                 
                            

दुनिया कुछ भी कहे,
हमने सबकी सुन ली।
राह चाहे कठिन लगे,
अब तो हमने चुन ली।।
हमने दी है लाखों कुर्बानी।
वीर-प्रसविनी,यह देश अभिमानी।।
मां अम्बे के शेर हैं हम..!
मईया खडग खप्पर धारी।
चलो आतंक को मिटा दे
अस्त्र दुश्मन पर हों भारी।

दुर्गा केसरी..
भारत है।
शमशेर हमारा..
भारत है।
यह आर्यावर्त…
भारत है।
हम सब हैं भारत के वासी।
और देश हमारा भारत है।

पहलगांव के घ्रिणि-कृतकारो सुनों।
मसूद अजहर, आसीम मुनीरों सुनो।
लश्कर, जैश, हिजबुल के मुरीदों सुनो।
नफरती नाच कराने वाले ठेकेदारों सुनो।
सुहागिनों के सिन्दूर मिटानेवाले हत्यारे सुनो।

सन ईक्हत्तर का कैलेण्डर..
क्या बात है।
पाक आर्मी का सरेंडर..
क्या बात है।
इंदिरा की आंधी..
क्या बात है।
नया देश बना दी..
क्या बात है।
कारगिल की पिटाई..
क्या बात है।
सर्जिकल स्ट्राइक..
क्या बात है।

कोशिशें लाख कर लो..
बंट नहीं सकता यह देश।
बात मस्तिष्क में भर लो..
यहां है अनेकता में एक।।
सिन्दूर का कर्ज अभी बाकी।
हम सब हैं भारत के वासी।
और देश हमारा भारत है।।

- शम्भु प्रसाद
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एक वर्ष पहले

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