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हृदय की कोमल धारा

                
                                                         
                            हृदय की कोमल धारा
                                                                 
                            
जब दिल से होकर गुजरती है,
तो दर्द की ज्वाला सी
धधकने लगती है।

और थकी हुई चेतना को
जब पीछे खींचता है,
तो इंसान अंदर से
बेजान-सा हो जाता है।

ज़िंदगी का हर एक सफ़र
वैसे तो बहुत मुश्किल है,
लेकिन जब हालात ही साथ छोड़ दे
तो मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।

फिर भी घने अंधेरों में
आशा की एक रोशनी
इस वीराने जीवन की राहों में
हर एक पल नया मोड़ दे जाती है
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एक घंटा पहले

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