आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

माँ की ममता

                
                                                         
                            जब बचपन याद आता है,
                                                                 
                            
तब माँ की प्यारी मुस्कान ज़रूर याद आती है।
माँ, भगवान की बनाई हुई सबसे सुंदर रचना है।
माँ ,वही साथी है,
जिसने हमें अपने हाथों से भोजन कराया,
वह जो खुद रातों को जागकर
हमें लोरी गाकर सुलाया।
हाँ, शिकायतें भी रहती हैं तुमसे माँ,
जब तुम हमें डाँट देती हो,
पर तुम्हारी वही डाँट
आज हमें एक बेहतर इंसान बना गई है।
कितनी अद्भुत हो तुम माँ,
पहले डाँटती हो,
और फिर प्यार से गले लगा लेती हो।
कहाँ से लाती हो तुम अपने भीतर इतनी प्रतिभा माँ?
तुम्हें ये सब किसने सिखाया?
शायद भगवान भी सोचता होगा—
कि मैंने क्या रचना कर दी,
जो अपने बच्चों के लिए लड़ जाती है,
जान दे देती है, पर हारती नहीं।
तुम्हें नमन है माँ ....
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
11 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर