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वो मेरा नहीं था।

                
                                                         
                            मैं उससे बहुत प्यार करती थी,
                                                                 
                            
और वो… मेरा भी नहीं था।

मैं उसके सपने देखा करती थी,
अपनी हर दुआ में उसे माँगा करती थी,
पर वो मेरा नहीं था।

मैंने जो ख्वाब सजाए थे,
शायद वो ख्वाब ही नकली थे,
क्योंकि उन ख्वाबों में वो था,
मगर हकीकत में… वो मेरा नहीं था।

मुझे ज़िद थी,
कि एक दिन वो मेरा होगा,
मैं उसकी दुनिया बनूँगी,
और वो मेरा सहारा होगा।

पर किस्मत को शायद
मेरी ज़िद मंज़ूर नहीं थी।

आज भी दिल उससे पूछता है—
मैं तुमसे लड़ना चाहती हूँ,
तुमसे शिकायत करना चाहती हूँ…
कि आखिर मेरा वो क्यों नहीं था?

मैंने तो उसे अपना मानकर
पूरी दुनिया उससे जोड़ ली थी,
फिर मेरी दुनिया में
वो मेरा होकर भी… मेरा क्यों नहीं था?

शायद कुछ लोग
हमारी ज़िंदगी में आने के लिए होते हैं,
हमारे होने के लिए नहीं।

और कुछ मोहब्बतें…
पूरी होने के लिए नहीं,
बस उम्रभर याद रहने के लिए होती हैं।
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6 घंटे पहले

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