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दिल के करीब

                
                                                         
                            तुम हमेशा मेरे दिल के करीब थी,
                                                                 
                            
और रहोगी, चाहे दूर कितनी भी सही।

तुम्हारी यादों से आज भी बातें करता हूँ,
खामोशी में तुम्हारा नाम पढ़ता हूँ।
वक्त ने बहुत कुछ बदल दिया मेरे अंदर,
मगर तुम्हें चाहने का सिलसिला नहीं बदला।

कभी तुम मेरी सुबह की पहली वजह थीं,
कभी मेरी रातों की आखिरी दुआ थीं।
आज भी जब अकेला बैठता हूँ कहीं,
तो लगता है तुम मेरे पास ही खड़ी थीं।

मैंने तुमसे कोई शिकायत नहीं की,
अपने हिस्से की हर तकलीफ़ सह ली।
तुम खुश रहो, बस यही चाहा दिल ने,
अपनी खुशी भी तुम्हारे नाम कर दी।

कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी अधूरे रहते हैं,
कुछ लोग दूर होकर भी दिल में पूरे रहते हैं।
तुमसे मिलना शायद मेरी किस्मत में था,
और तुम्हें याद करना मेरी आदत में रहा।

ना कोई वादा माँगूँगा, ना कोई जवाब,
बस दिल में तुम्हारा एहसास रहने दो।
अगर कभी मेरी याद आए तुम्हें,
तो पलभर के लिए मुझे अपने पास रहने दो।

तुम हमेशा मेरे दिल के करीब थी,
और रहोगी, चाहे ज़िंदगी बदल जाए।
मेरी कहानी का अंत चाहे जैसा हो,
तुम्हारा नाम मेरे दिल से कभी न मिट पाए.
-समीर "प्यासा"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

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