आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आजकल ज़िन्दगी

                
                                                         
                            आजकल ज़िन्दगी कुछ इस तरह मुस्काती है
                                                                 
                            
खूबसूरत  मुझे हर शाम नज़र  आती है

हर पहर हर घड़ी अब दिल रहे गुलज़ार मेरा
ख़ुशबू यादों की तेरी दिल को यूँ महकाती है

डर नहीं लगता है अब मुश्किलों के आने से
हौसलें भर जुबाँ जब गीत नये गाती हैं

अब बचाने में तुझे ख़ुद को सँभाले कब तक
ये घुटन दिल से परे रूह तलक जाती है

इक मुलाक़ात में पहचान कहाँ पाओगे
रंगतें चेहरों की रोज़ बदल जाती हैं
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर