आओ सुनाऊँ एक गुड़िया की कहानी
अपने दिल की जुबानी l
माँ की दुलारी, पापा की प्यारी,
नाचती, खेलती, अटखेलियां करती,
जिंदगी के पड़ाव को पार करती....
बड़ी भी न हो पाई, अचानक एक खबर आई l
जिसने पूरी दुनिया हिलाई, वह ये समझ न पाई, क्यों थी घर में रुदाली सी छाई l
अचानक एक साया सा छाया, सफेद चादर में लिपटा एक पार्थिव शरीर आया l
बहन थी गुमसुम, भाई का न था ठिकाना,
किसीने कहा इन बच्चों को और आगे न ले जाना l
माँ ने आंसू पौछे और कहा...
फौजी की औलादें हैं, खौफ नहीं खाएंगी...
अपने पिता को आखिरी सलामी देकर आएंगी l
बड़ी होती गई, सीखे तौर तरीके और सालीखे।
अब बारी आई, भाई ने डोली सजाई,
मॉ ने आंसू फिर छुपाए और की बिदाई l
मायके से ससुराल आई और जिम्मेदारी पाई l
अपनी सुध भूली, सबकी खुशियों में खुशियाँ पाई।
संस्कारों का वास्ता था, नए परिवार को अपना बनाना था l
माँ से जब बात होती.. बस यही कहती तू चिंता मत कर मैं हूं तेरे साथ l
यकायक फिर छाया वही मातम का अंधेरा, मॉ ने इस जीवन से मुख फेरा l
दुनिया ही उजड़ती दिखी, तभी मुझे मेरी नन्ही परी सामने खड़ी मिली l
उसने हाथ मेरा थामा और कहा मॉ नानी की तरह तुम तो तारा नहीं बन जाओगी ना l
मेरा मन भर आया उसे गले लगाया और कहा तु चिंता मत कर मैं हूं तेरे पास l
सार यही है...
माँ की ममता में ही बसता है जीवन का विश्वास।
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