आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दरअसल, शिकायत किसी अधूरी इच्छा का शोर नहीं

                
                                                         
                            शिकायत
                                                                 
                            

दरअसल, शिकायत
किसी अधूरी इच्छा
का शोर नहीं
विश्वास की
आखिरी आवाज है

हर किसी से
नहीं की जाती
शिकायत
शिकायतों को भी
उम्मीद होती है
सुने जाने की

कभी समाज से
कभी व्यवस्था से
तो कभी ईश्वर से

मनुष्य माँगता है
हिसाब और बही
उसके हिस्से का न्याय

मगर हर आवाज
हाकिम तक
नहीं पहुँचती
कुछ दरवाजों पर
दम तोड़ देती हैं
कुछ फैसले से पहले ही
मंसूख कर दी जाती हैं

इस दुनिया में
न्याय से पहले
शिकायतकर्ता की
पात्रता देखी जाती है

जब मनुष्य
शिकायत करना
छोड़ देता है
तब समझना
उसकी समस्या
का समाधान
नहीं हुआ
उसके भीतर की
उम्मीद ने
दम तोड़ दिया है।

सबसे बड़ा
अन्याय यही है
मनुष्य से उसका
शिकायत करने
का अधिकार
छिन जाना
या
छीन लिया जाना !
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर