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मोहब्बत का है मौसम समाँ  है सुहाना

                
                                                         
                            मोहब्बत का है मौसम समाँ  है सुहाना,
                                                                 
                            
बहारों ने  छेड़ा है  मोहब्बत का तराना।

घिर आई  हैं आस्माँ में घटाएं प्यार की,
ऐसे में ऐ दिलबर तू  हमें भूल न जाना।

अलसाया  सा प्यार  लेने लगा अंगड़ाई,
अरमान  भरा  दिल होने को है दीवाना।

प्यार का है आलम  आ जाओ दो घड़ी,
मिल-जुल करें याद  वो ज़माना पुराना।

मोहब्बत की शम'आ फिर करो रौशन,
पंख  जलाने  को  बे-ताब है  परवाना।
--- शैलेन्द्र भटनागर "शील "
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45 मिनट पहले

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