जैसे जैसे उमर चढ़ने लगा है,
हमारे बीच प्यार बढ़ने लगा है।
ऐसा नहीं कि लड़ाई करते हैं कम,
एकदूजे की बड़ाई भी करते हैं हम,
फिक्र करने लगे हैं एकदूजे की ज्यादा,
शायद बढ़ती उम्र का है ये तकादा,
बच्चों का भविष्य गढ़ने लगा है ,
हमारे बीच प्यार बढ़ने लगा है।
खाने पर करते हैं अब भी इंतजार ,
देर हो जाए,तो मन रहता बेकरार,
सड़ु,खड़ुस,सारी उपमाएं हो जाती हैं बेकार ,
आफिस लौटने के बाद जब होता है इनका दीदार,
अंधियारी रात पर सुर्याभा पड़ने लगा है,
हमारे बीच प्यार बढ़ने लगा है।
-शैलबाला कुमारी
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