आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तेरी याद दिल से निकलती नहीं है

                
                                                         
                            तेरी याद दिल से निकलती नहीं है
                                                                 
                            
हवा बेवफ़ाई की बदलती नहीं है
तेरी याद दिल से निकलती नहीं है
हवा बेवफ़ाई की बदलती नहीं है

ज़हन में गूँजती हैं मेरे ग़म की सदाएं
याद आती हैं ज़ालिम वो क़ातिल अदाएँ
जो खला थी दिल में है गम का बसेरा
तेरी कमी हरजाई अब खलती नहीं है

तेरी याद दिल से निकलती नहीं है
हवा बेवफ़ाई की बदलती नहीं है
तेरी याद दिल से निकलती नहीं है
हवा बेवफ़ाई की बदलती नहीं है

तेरा जो वादा था जन्मो जनम का
वादा जो टूटा छूटा संग सनम का
ना तेरा भरोसा ना वफ़ा ओ क़सम का
शमा प्यार की दिल में अब जलती नहीं है

तेरी याद दिल से निकलती नहीं है
हवा बेवफ़ाई की बदलती नहीं है
तेरी याद दिल से निकलती नहीं है
हवा बेवफ़ाई की बदलती नहीं है

विसाल ए यार को मैं तरसता रहा
अश्कों का सावन बरसता रहा
लाख चाहे कोई आंसू बहाए
स्याही किस्मत की धुलती नहीं है

तेरी याद दिल से निकलती नहीं है
हवा बेवफ़ाई की बदलती नहीं है
तेरी याद दिल से निकलती नहीं है
हवा बेवफ़ाई की बदलती नहीं है
-अश्क़ फ़तेहपुरी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
48 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर