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प्यार की निशानी

                
                                                         
                            सुनो दुनिया वालों ये मेरी कहानी
                                                                 
                            
दिल जब टूटा हँसी दुनिया दीवानी
मुस्कुरा के जब वो कह गया कसम से
ज़ख्म जो दिये हैं प्यार की निशानी

बना दिया है उसने मेरे प्यार को तमाशा
रुस्वा उनकी गलियों में हुई है जवानी
ज़हर जफ़ा का मुद्दत से पी रहे हैं
रोते हुए कटी है मेरी ज़िंदगानी

हंसते हुए ज़ख्मों को देख के ज़माना
फिर गले मिल रहीं हैं वो यादें पुरानी
सोने से पहले तेरी याद आती है हर शब
बेवफ़ाई है नींद की या तेरी मेहरबानी

रोता है आसमां भी फुरकत ए यार में
करता है मेरे ख्यालों की तर्जुमानी
नहीं कोई अपना जहाँ में शाहिद
बसा ले नई प्यार की बस्ती अनजानी
-अश्क़ फ़तेहपुरी
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48 मिनट पहले

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