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डरता हूँ

                
                                                         
                            जब मैं देखता हूँ तुमको
                                                                 
                            
देखते ही खामूश हो जाता हूँ
और जब
मेरी ओर नज़र मिलती है तुमसे
तब
जी नहीं चाहता
आँखें हटाने को तुमसे.......
पता नहीं क्या है तुममें??

तुम भी तो
देखती रहती हो मुझको
जबतक मेरी नज़र न हटती तुमसे
पता नहीं क्या है तुममें!

देखते ही तुमको
बात करने का मन करता है
लेकिन
क्या करे
बात करने से भी डर लगता है.....
ना ना ना
बात करने से नहीं,
सच बताओं तो
बात-चीत के बहाने
प्यार हो जाने से....
प्यार प्यार प्यार
प्यार क्या है?
दो अनजान दिलों का मिलाप है।

इन मिलाप से डर लगता है
क्योंकि इन प्यार वाले दिलों से
झगड़ा हो जाता है
और दोनों एक दूसरे को सताने लगता है
पर
मैं सताना नहीं चाहता तुमको

इसलिए
मैं देखता रहता हूँ तुमको
क्योंकि मैं डरता हूँ
तुमसे नहीं
प्यार से......!!

-शहिदुल इस्लाम खान
 
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4 वर्ष पहले

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