बिना कारण के ही,
जब मन हो जाए व्यथित.
बिना बात के ही
आरोप लग जाएं जीवन पर.
तब स्त्री टूट जाती है,
बिखर जाती है,
बिना अपराध के ही
मुलज़िम घोषित हो जाती है.
पर स्त्री, तुम मत घबराओ,
तुम सही हो तो डरो मत,
न ही घबराकर अपने आपको छुपाओ.
आगे बढ़ों और झूठ का पर्दाफाश करो..
-शाहाना परवीन 'शान'
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