आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

झूठ का पर्दाफाश

                
                                                         
                            बिना कारण के ही,
                                                                 
                            
जब मन हो जाए व्यथित.
बिना बात के ही
आरोप लग जाएं जीवन पर.
तब स्त्री टूट जाती है,
बिखर जाती है,
बिना अपराध के ही
मुलज़िम घोषित हो जाती है.
पर स्त्री, तुम मत घबराओ,
तुम सही हो तो डरो मत,
न ही घबराकर अपने आपको छुपाओ.
आगे बढ़ों और झूठ का पर्दाफाश करो..
-शाहाना परवीन 'शान'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर