फूलों की तरह हसंते रहो और
पंछियों की तरह चहकते रहो।
दुनिया के ग़म तुम्हें छू भी न पाएं,
खुशियों के तराने तुम्हारे
घर - आँगन को सजाएँ।
मुबारक और हसीन मौका
खुदा ने जो अता फरमाया,
बंदगी की राह पर
एक बार फिर से तुम्हें चलाया।
अपने फर्ज़ के साथ आगे बढ़ते रहो,
मुबारक हो ईद -उल -अजहा
मुस्कुराते रहो।
-शाहाना परवीन 'शान'
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