आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ईद उल अदहा

                
                                                         
                            फूलों की तरह हसंते रहो और
                                                                 
                            
पंछियों की तरह चहकते रहो।
दुनिया के ग़म तुम्हें छू भी न पाएं,
खुशियों के तराने तुम्हारे
घर - आँगन को सजाएँ।
मुबारक और हसीन मौका
खुदा ने जो अता फरमाया,
बंदगी की राह पर
एक बार फिर से तुम्हें चलाया।
अपने फर्ज़ के साथ आगे बढ़ते रहो,
मुबारक हो ईद -उल -अजहा
मुस्कुराते रहो।
-शाहाना परवीन 'शान'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर