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नई सदी से मिले हमको कैसे ये उपहार है?

                
                                                         
                            भारत की सभ्यता ,भारत की संस्कृति को सारे जगत में मान मिला
                                                                 
                            
अति आधुनिकता छाई, भारत की संस्कृति को भारत में अपमान मिला
पाश्चात्य संस्कृति का अंधा अनुसरण ,निज संस्कृति को भुलाया है
परंपराएं भूले ,पारंपरिक ढांचे टूटे हैं परिणाम यह पाया है
सुविचार नहीं है ,मन में भर गए विकार हैं
नई सदी से मिले हमको कैसे ये उपहार हैं ?
सब मिलजुल के रहते थे ,संयुक्त होते थे परिवार
भय होता था बड़ों से ,बच्चे पाते थे संस्कार
बच्चों पर रहता था ,सबका ही विशेष ध्यान
भारत में कब था ये एकल परिवार का विधान
एकल परिवार हमने कर लिए स्वीकार हैं
नई सदी से मिले हमको कैसे ये उपहार हैं ?
बड़े समझाते बताते थे ,प्रेम भी जताते थे
गलती पर डांट फटकार खूब लगाते थे
एकल परिवार, व्यस्तताएं बढ़ी, बच्चों को मिले न संस्कार हैं
पथभ्रष्ट हो गए युवा ,न जाने कितने नशे के शिकार हैं
मात-पिता गुरु से होती अब तकरार हैं
नई सदी से मिले हमको कैसे ये उपहार हैं ?
प्रेम जताते हैं ,शीतल है, माता-पिता ये कैसी मजबूरी है
सोने को आभूषण बनाने को कुछ तो ताप जरूरी है
हम से मैं तक आए हैं
मूल्य सारे बिसराए हैं
अब बदल गया हमारा व्यवहार है
नई सदी से मिले हमको कैसे ये उपहार हैं ?
पहले परवरिश में ताप शीत का मेल था
मूल्य थे ,संस्कार थे ,जीवन न बस खेल था
दिखाया वैभव ,टेलीविजन और मोबाइल ने ,अपराधों का कारण है
बढ़े विकारों ,विकृतियों ,कुकृत्यों, दुराचारों का जरूरी निवारण है
प्रबल भौतिकीकरण ,टूट रहे परिवार हैं
नई सदी से मिले हमको कैसे ये उपहार हैं ?
जो बिखरे परिवार ,बिखरेगा समाज का ताना-बाना
व्याप्त होगी अराजकता ,न मानव, पशु सम होगा जीना
परिवार और समाज ही मर्यादा में चलना सिखाते हैं
कैसे यश अपयश मिलेगा ,भेद उचित अनुचित का बताते हैं
टूटेगा समाज ,परिवार आधार है
नई सदी से मिले हमको कैसे ये उपहार हैं ?
जिनके हौसलों से निकल सकता है चट्टानों से पानी
क्या जोश ,ऊर्जा अजब होती है जवान खून में रवानी
जिनका हो भविष्य उज्जवल ,वही हो रहे बीती दुखद कहानी है
जानबूझकर क्या कोई ग्रास काल का बनता है ,कैसी नादानी है
युवा ही होता सबसे बड़ा हथियार है
नई सदी से मिले हमको कैसे ये उपहार हैं?
कुछ लोगों के मन में खुराफात, धन की लालसा भारी है
बहलाते युवाओं को उनके हत्यारे, हैं शिकारी हैं
किसी के बहकावे में आना मतलब अपना जीवन गंवाना है
माता-पिता को दुख देना ,जीवन भर उनको रुलाना है
देश अब तो को रहा बड़े होनहार है
नई सदी से मिले हमको कैसे ये उपहार हैं?
जागे जन-जन उद्देश्य अब तो सबको ही जगाना है
वर्तमान में प्रयास कर हमको भविष्य बचाना है
युवाओं को समझाकर सुमार्ग पर लाना है
अच्छे इंसान होने का कर्तव्य हमें निभाना है
मिलकर चले ,हो न सकती हमारी हार
है
नई सदी से मिले हमको कैसे ये उपहार हैं?
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एक वर्ष पहले

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