“दोष किसका है?”
इसमें भी एक औरत, लड़की
और छोटी बच्ची की ही गलती होगी…
शायद छोटे कपड़े पहनती हैं, इसलिए।
दुपट्टा नहीं लेती हैं,
या सही तरीके से नहीं लेतीं, इसलिए।
टाइट जींस पहनती हैं, इसलिए।
देर रात बाहर रहती हैं,
लड़कों से दोस्ती करती हैं,
जॉब करती हैं,
या फिर अकेली रहती हैं…
इसलिए?
तो फिर जो बुर्क़ा पहनती हैं
और घर के अंदर रहती हैं,
उनके साथ क्यों?
जो छोटी बच्ची होती हैं,
मासूम होती हैं…
फिर भी उनके साथ क्यों?
कहाँ जाएँ औरतें, लड़कियाँ और बच्चियाँ?
क्या उन्हें इस धरती पर सुरक्षित जीने का भी हक़ नहीं?
ऐसा करने वालों को
अपने किए का जवाब देना चाहिए,
न कि औरतों, लड़कियों और बच्चियों को
दोष दिया जाना चाहिए।
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