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मेरी ख़ामोशी का ज़र्फ़

                
                                                         
                            तुम मुझे सिर्फ़ चाह सकते हो,
                                                                 
                            
मगर अपना नहीं बना सकते।
तुम मुझे आज़मा तो सकते हो,
मगर मेरा ज़र्फ़
और मेरा इंतज़ार
कभी समझ नहीं पाओगे।
तुमने मुझे
मुस्कुराते हुए देखा है,
मगर मेरे दर्द की
गहराई नहीं देखी।
मैं समंदर के तूफ़ान-सी हूँ...
मेरे अंदर उठते तूफ़ानों को
तुम संभाल नहीं पाओगे।
तुम मुझे
कभी समझ नहीं पाओगे।
 
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38 मिनट पहले

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