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मुझे तेरे सिवा कुछ और नहीं दिखता

                
                                                         
                            मुझे क्या खबर लोगों की,
                                                                 
                            
क्या दिखता है क्या नहीं दिखता
बात सिर्फ इतनी सी है,
मुझे तेरे सिवा कुछ और नहीं दिखता

मेरी तन्हाई की महफ़िल को देख,
उजाले में परछाई को देख,
मुझे वो साया नहीं दिखता

क्या दिखता है क्या नहीं दिखता,
मुझे तेरे सिवा कुछ और नहीं दिखता।।।।

रात में चाँद नहीं दिखता,
सुबह में सूरज नहीं दिखता,
कहने के लिए कुछ नहीं मेरे पास,
सच कहूँ तो दिन में उजाला नहीं दिखता

क्या दिखता है क्या नहीं दिखता,
मुझे तेरे सिवा कुछ और नहीं दिखता।।।।

भरी दोपहरी की शाम को देख,
भारी बरसात के अकाल को देख,
मुझे ज़रा भी मैं गीला नहीं दिखता

क्या दिखता है क्या नहीं दिखता,
मुझे तेरे सिवा कुछ और नहीं दिखता।।।।

दर्पण में अब मैं नहीं दिखता,
मैं होकर भी मैं, मैं नहीं दिखता,
उम्मीद जो खो चला हूँ मेरे पास,
मुझे मुझमें मेरा ख़ुदा नहीं दिखता

क्या दिखता है क्या नहीं दिखता,
मुझे तेरे सिवा कुछ और नहीं दिखता।।।।
-: Shabd Anjaan
My blog -: https://marubucin.blogspot.com/?m=1
My YouTube channel -:
https://youtu.be/rrjeOYZ63r8


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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