बारिश मैं और ये हजारीबाग
देखो आज फिर निकले साथ
साइकिल मेरी खाली सड़के
भीगी भीगी हर एक राह
झील किनारे बादल ठहरे
कैनरी हिल पर धुंध है आज
पेड़ो से टप टप गिरती बूंदें
मिट्टी में घुलती सोंधी बात
बारिश मैं और ये हजारीबाग
जब भी मिलते हैं यार
खुसुर फुसुर बातें करते हैं
करते हैं हम दिल की बात
भीगी गलियां चाय की भाप
शहर लगे कुछ और ही आज
झील किनारे लहरें बोले
आज कहां जाने की जल्दी है यार
बारिश मैं और ये हजारीबाग
किसको किसकी पड़ी है आज
वो बरसे तो मैं भीगूं
मैं निकलू तो वो बरसे आज
कपड़े भीगे कॉपी भीगे
भीग जाए सौरव (100₹v) आज
बूंदो से जब शहर हो धुँधला
मन को खीचे बार बार
बारिश मैं और ये हजारीबाग
बस इतना सा है अपना राज
शहर नहीं लगता ये मुझको
लगता है जैसे कोई अपना घर बार
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