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एक व्याख्या भारत की

                
                                                         
                            जब सुबह चन्द्र ढल जाता है,
                                                                 
                            
जब सूरज आँख दिखाता है ;
तन तपता है, मन तपता है ,
पर कहीं खुशी दे जाता है ;
जब कभी कोई भी नव मनुष्य,
सुंदर धरती पर चलता है;
यह भारत माँ का अम्बर हैं,
पग-पग पर रंग बदलता है ||

कहीं नव किसलय के फूल खिले,
कहीं शीतल मंद सुगंध बहे ;
कहीं कोमल निर्मल नदियां हैं,
तो कहीं बचपन की निंदिया हैं;
है इधर खेत तो उधर रेत,
रंग रूप वेश भाषा अनेक;
नदियां पहाड़ नीरव पठार,
तो कहीं पे बंजर धरती है ;
यह भारत माँ की धरती है,
प्रति पग पर भेष बदलती है ||

कहीं है हिन्दू, कहीं मुसलमान ,
कहीं रामायण, कहीं है अज़ान ;
कहीं बुद्ध सरन, कहीं महावीर ,
कहीं है इसाई, कहीं गुरुनाम ;
ईश्वर हैं इसके कण-कण में ,
युग युग में वेश बदलते हैं;
ये भारत माँ के मंदिर हैं,
हर चिर प्रदेश में बसते हैं ||

कहीं हैं आज़ाद, कहीं भगत सिंह,
कहीं गांधी हैं, कहीं ऊधम सिंह ;
भारत माँ सबकी हैं माता ,
है एक ईश जग विख्याता;
हम सभी एक, भाषा अनेक,
भारत का धड़कता दिल हैं हम ;
दुनिया क्या रोकेगी हमको,
हम मंगल तक जा सकते है;
हम भारत माँ के हैं सपूत ,
हर दिल की बात समझते हैं ||

राम हो या हनुमान हो, सद्गुरु हो या अज़ान |
भारत ही सबका हृदय, भारत सबकी जान ||
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एक वर्ष पहले

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