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एक बेहतर कल

                
                                                         
                            जो आज नहीं वो कल होगा।
                                                                 
                            
मन तो मन है, विह्वल होगा ॥
हर कल में कुछ अन्तर होगा।
शायद इकपल बेहतर होगा।।
शायद वो कल बेहतर होगा ।।
चाहे कितनी ठोकर देता,
यह समय अचल दुस्तर होगा।
इक दिन वह मालिक देखेगा,
तेरा हर काम सफ़ल होगा।
तेरा वो कल बेहतर होगा ।।
यदि कर्म है तेरा सत्यनिष्ठ,
कर सकेगा कोई क्या अनिष्ट ।
एक अंश हो तुम भी भगवन के,
मन अगर तेरा निश्छल होगा।।
तब शायद कल बेहतर होगा ।।
अपने प्यारों का इम्तिहान
लेता है वो जो चिर महान ।।
मत हो निराश जो आज नहीं,
तू डट जा, निश्चित कल होगा।।।
हाँ, तेरा कल बेहतर होगा ।।
शायद एक बेहतर कल होगा।
या फ़िर एक कल बेहतर होगा ।।
यदि दृढ़ निश्चय का बल होगा ।
कुछ कर जाना ही हल होगा ।।
तब तेरा कल बेहतर होगा ।।
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एक वर्ष पहले

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