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ममता का स्वरूप

                
                                                         
                            मांगता कुछ पल मैं तुझसे, जान तू मेरी मांगती ।
                                                                 
                            
छीन ना सकेगी जा मेरी तू, मेरी माँ अभी है जागती ।।
तू जानती क्या नही उसे, वो मात दे देती भगवान को ।
कलेजे से लगा कर रखती है, वो अपने हृदय के टुकड़े जान को ।।
रुक जा अभी तू मौत ऐ, क्या मौत तेरी आई है ।
माँ ने तुझे देखा जो तो, तेरी मौत खड़ी थर्राई है ।।
तू जादुई हो सकती है, तेरा हो सकता बड़ा अस्र है ।
ममता से भरी माँ मेरी, ममता ही उसका शस्त्र है

कवि - सौरभ मिश्रा हिन्द
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2 वर्ष पहले

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