उंगलियाँ मुझपे जो सरकार उठा देते हो
और बेहतर मेरा किरदार बना देते हो
जाम में ज़ह को चुपके से मिला देते हो
उम्र लम्बी हो मेरी ये भी दुआ देते हो
रास्तों पर मेरे कांटों को बिछाने वालो
तुम मेरे पैरों की रफ़्तार बढ़ा देते हो
आइना तुमको दिखाने की जिसने की कोशिश
तुम भी उस पर कई इल्ज़ाम लगा देते हो
घोंट देते हो गला पहले मेरी चाहत का
और फिर मुझको हसीं ख़्वाब दिखा देते हो
जिदगी जीने के आदाब भी कुछ होते हैं
बाअदब हो के भी यह बात भुला देते हो
आपसे उसको ही ज्यादा है शिकायत 'रूबी'
आप जिसपे ये दिलो जान लुटा देते हो
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X