जहां पावन गंगा का किनारा है
जहां सरयू का किनारा है
जहां बगल में बक्सर,आरा है
जहां जय प्रकाश का सिताबदियारा है
जहां "विश्व विजयी बनो" का गूंजता नारा है
जहां " वसुधैव कुटुंबकम्" का गूंजता नारा है
जहां " बनो निडर" का गूंजता नारा है
जहां की माटी में अंगारा है
जहां सुंदरता का नजारा है
जहां उजियारा है
जहां भाईचारा है
वहां घर हमारा है
वह देवस्थान हमारा है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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