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किताबें रह जाएंगी

                
                                                         
                            मैं तो चला जाऊंगा मेरी किताबें रह जाएंगी
                                                                 
                            
लोगों के दिलों में मेरी यादें रह जाएंगी
जीवन क्या है,झरना है,नदी है,इसे बहना है
जीवन में मुझे सच सच कहना है
किसको यहां रहना है?
दुख,सुख सदा सहना है
कभी जीत, कभी हार
दोनों में हैं हम तैयार
जीवन में आगे बढ़ते जाना है
कुछ सुनना है, कुछ सुनाना है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
18 घंटे पहले

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