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बालगीत

                
                                                         
                            दूर देश से आए बादल।
                                                                 
                            
ढेरों पानी लाए बादल ।।
कहीं पे भालू, कहीं पे बंदर,।
कहीं ऊंट हाथी बन जाते ।।
कहीं पे छन छन ,छन पैजनियां,।
कहीं पे ढपली ज़ोर बजाते।।
कहीं में धूल ,धूल धूसरित,।
कहीं नीले कहीं ,काले बादल।।
नाचे मोर कोयलिया गाए,।
पीहू पीहू पपिया शोर मचाए।।
कहीं परियों से पंख लगाए,।
कहीं गोरे कहीं ,काले काजल ।।
 
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।  आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
4 वर्ष पहले

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