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खुद को समझ न पाया अब तलक

                
                                                         
                            बात चाहे हो कैसी भी
                                                                 
                            
हामी न भरने की कसम
जुबां ले कर बैठी है
और तुमने इजहार
मुहब्बत का कर दिया
क्या कह दूँ अब
कि खुद में उलझा हूंँ
तुममें उलझूं कैसे
खुद को समझ न पाया अब तलक
तुमको समझूं कैसे
मौलिक रचना
-सत्यनिधि द्विवेदी अंशिल
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6 घंटे पहले

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