वो जो अपनी ज़िद पूरी करने में ज़रा भी माहिर नहीं लगता है,
दिल की बात छुपा ले, वो इतना भी आलिम नहीं लगता है।
मेरे इश्क के जज्बातों ने उससे तरजीह माँगी थी,
फिर भी वो न जाने क्यों मेरा रहबर नहीं लगता है!
— सत्यनिधि द्विवेदी 'अंशिल'
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