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निराशा

                
                                                         
                            तेरी निराशा कुछ नहीं
                                                                 
                            
आशाओं का परिणाम हैं
हार भी सारी तेरी
बस जीत का ही नाम है
उलझनें सारी यहाँ
बस सुलझनों की शाम है
रात जितनी हो घनी
वो सुबह का अभिराम है
विश्राम कर , तू रुक नही
आराम कर , पर थक नही
लक्ष्य तेरा है निकट,
अब कहीं तू झुक नहीं
ये समय है ए पथिक
जब सत्य को तुम मान लो
चलना ही तेरा कर्म है
सुन पथिक ये जान लो ।।
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3 वर्ष पहले

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