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तीरगी के आगे नतमस्तक है सारी आँखें

                
                                                         
                            तीरगी के आगे नतमस्तक है सारी आँखें
                                                                 
                            
रौशनी तक देख पाती है हमारी आँखें

तुम नकाबों में छुपा लो झूठ का चहेरा पर
सच बयाँ हम से करेगी ये तुम्हारी आँखें

चीज कोई हो कहीं पर अपने मतलब की तो
दूर से ही ताक लेती है शिकारी आँखें

उससे आँखें मैं मिलाऊ तो मिलाऊ कैसे
दिल को घायल उसकी करती है कटारी आँखें

मेरी आँखों को पिला मत हुस्न की तू बादा
मुझको भटका देती है मेरी खुमारी आँखें

सामना जब तक हकीकत से नहीं होता है
ख्वाबों में रहती है तब तक ख़ुद-शुमारी आँखें

आने का था तेरा वादा, लौट के अब तू आ
राह तेरी देखती है इंतजारी आँखें

- सतीश बोरकर  
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10 घंटे पहले

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