मैत्री करुणा शील प्रज्ञा से हमें अवगत कराया।
बुद्ध ने जग को दुखों से मुक्ति का पथ है दिखाया।
ढाई आखर प्रेम का पढ़, सच्चे पंडित हो गए सब,
पोथी के जंजाल से जग को कबीरा ने बचाया।
पेट सब का हो भरा और सब का हो खुशहाल जीवन,
एक हो बेगमपुरा रैदास ने जग को सुझाया।
मनखे मनखे इक बरोबर भेद उनमें है नहीं कुछ,
बाबा घासी दास ने सन्देश समता का सुनाया।
विद्या के बिन मति नहीं है, विद्या के बिन गति नहीं है,
ज्योतिबा के संग सावित्री ने जन जन को पढ़ाया।
आदमी की जाति है इक आदमी का धर्म है इक,
मंत्र मानवता का नारायण गुरू जी ने बताया।
देश अपना राज अपना जल जमीं जंगल है अपना,
क्रांति का दीपक जनों के दिल में बिरसा ने जलाया।
मंदिरों में दान मत दो, खर्च शिक्षा पर करो तुम,
गाडगे बाबा से हम ने, इक सहज उपदेश पाया।
तर्क की तलवार से पाखंड का सिर काट दे वो,
पेरियार इक क्रांति है प्रति क्रांति को जिसने दबाया।
देश के सब शोषितों में आत्म गौरव को जगा के,
बाबा साहब ने हमें सम्मान से जीना सिखाया।
- सतीश बोरकर
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