प्रज्ञा शील समाधी का रखना तुम ज्ञान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
सत्य को तुम सत्य ही जानो,
असत्य की तुम नस पहचानो।
अपना नजरिया साफ रखो,
दुष्टों को तुम माफ करो।
सम्मा दिट्ठि से निर्मल होता मन जान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
नेक राह पर कदम बढ़ाओ,
मन को अपने सुदृढ़ बनाओ।
दुर्बलताओं का करो तुम नाश,
लोभ मोह की छोड़ो प्यास।
सम्मा सङ्कप्प से दृढ़ता का होता भान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
प्रज्ञा शील समाधी का रखना तुम ज्ञान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
व्यर्थ की बातों मे न लगो,
पाप करम से तुम दूर रहो।
मुख से सत्य वचन ही बोलो,
रिश्तों में तुम मिश्री घोलो।
सम्मा वाचा का रखना तुम हरदम ध्यान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
प्रज्ञा शील समाधी का रखना तुम ज्ञान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
तन को अपने काबू में रखो,
हिंसा का मत तुम स्वाद चखो।
नैतिक कर्म ही करते जाओ,
जीवन को तुम स्वच्छ बनाओ।
सम्मा कम्मन्त से संसार में बढ़ता मान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
प्रज्ञा शील समाधी का रखना तुम ज्ञान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
ईमानदारी से करो कमाई,
दूसरों की भी करो भलाई।
लालच धोखा से तुम रहो दूर,
न्याय संगत चरित्र रखो हुजूर।
सम्मा आजीव से व्यक्ति की होती पहचान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
प्रज्ञा शील समाधी का रखना तुम ज्ञान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
चित्त को अनुशासन में लाना,
शुद्ध विचारों को तुम जगाना।
अकुशल ख़्याल को छोड़ दो,
अधर्म का बंधन तुम तोड़ दो।
सम्मा वायाम से संयमित होते अरमान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
प्रज्ञा शील समाधी का रखना तुम ज्ञान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
राग द्वेष के बिना है देखना,
मन विचार और तन की घटना।
होश में रहकर कदम बढ़ाओ,
जीवन को तुम सफल बनाओ।
सम्मा सति सजगता का देती है वरदान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
प्रज्ञा शील समाधी का रखना तुम ज्ञान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
चंचल मन को स्थिर कर लो,
भीतर गहरी शांति तुम भर लो।
चित्त पर जब होती है विजय,
तब मिट जाते हैं सारे भय।
सम्मा समाधि की साधना से मिलता है निर्वाण,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
प्रज्ञा शील समाधी का रखना तुम ज्ञान,
आर्याष्टांगिक मार्ग से जीवन बनता महान।
- सतीश बोरकर
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