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'तेरा दीवाना' तेरी ही चौखट पे ज़िंदगी लुटाए बैठा है।

                
                                                         
                            अपने दिल के कोने में दिया जलाए बैठा है,
                                                                 
                            
तुझे अपने दिल के मंदिर में बसाए बैठा है..
ना सुनता है किसी की, बड़ा मगरूर आशिक है,
तेरी चौखट पर सर झुकाए बैठा है..
जमाने ने लाख कहा, पर ना माना उसने,
बस तेरी यादों को सीने से लगाए बैठा है..
तू लौट आएगी, इसी आस में,
रात भर आँखों में ख्वाब सजाए बैठा है..
जो कभी अपनी शर्तों पर जीता था ज़िन्दगी,
वो आज खुद को तेरे साये में गँवाए बैठा है।
दुआओं में बस एक तेरा ही नाम बचा है,
वो दुनिया की हर महफ़िल भुलाए बैठा है।
थक चुकी हैं आँखें राह तकते-तकते तेरी,
पर धड़कनों में उम्मीदें जगाए बैठा है।
वो जो झुकता नहीं था कभी किसी के आगे,
आज तेरी गलियों में खुद को मिटाए बैठा है।
अब तो आ जा कि सांसों का सफ़र थपने को है,
'तेरा दीवाना' तेरी ही चौखट पे ज़िंदगी लुटाए बैठा है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
52 मिनट पहले

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