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ठंड का दर्द और उम्मीद की धूप

                
                                                         
                            ठंड का मौसम जब आता है,
                                                                 
                            
अपने साथ एक खामोश दर्द लाता है।
सूनी राहें, कोहरे की वो चादर,
ठिठुरती रातों में हर कोई सिमट जाता है।

सर्द हवाएं जब छूकर गुजरती हैं,
पुरानी यादें दिल में फिर उभरती हैं।
सूखे पत्तों का वो शाखों से गिरना,
जैसे तन्हाई की दास्तान बयां करती हैं।

धुंध में खोया वो सूरज का चेहरा,
उदासी का हर तरफ लगा है पहरा।
इस मौसम की सीलन में छुपा है जो दर्द,
वो गहरा है, बहुत ही ज्यादा गहरा है।

पर इस ठंड के बाद ही तो बहार आएगी,
ज़िंदगी फिर से मुस्कुराएगी।
सह लो ये कुछ पलों की उदासी,
नयी धूप फिर नया सवेरा लाएगी।

-: सार्थक पियुष सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 दिन पहले

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