ना महलों की चाहत,
ना शहरों की रोशनी,
मुझे तो भाती है
ये मिट्टी और हरियाली।
जहाँ नन्हे फूल भी
मुस्कुराना सिखाते हैं,
वहीं तो मेरे पहाड़
दिल के करीब आते हैं।
— माटी के अल्फ़ाज़
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