जन्मादिन मुबारक हो,
'सच्ची मित्रता' के प्रतीक हे श्रीकृष्णा ;
आपके उपदेश 'कर्म की प्रधानता',
कि हम सबको है तृष्णा ;
आपका 'शांत और मुस्कुराता हुआ चेहरा',
हमें सिखाता, नहीं किसी से करना घृणा ;
आपने ही सिखाया हमें,
'समानता के भाव' के साथ जीना ;
श्रीकृष्णाजी के छत्रछाया में,
हमें नफ़रत का ज़हर नहीं है पीना I
-संतोष कुमार सिंह
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