आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हर कोई लगा है कतार में

                
                                                         
                            हर कोई लगा है कतार में,
                                                                 
                            
इस दुनिया से जाने के लिए,
कब किसकी बारी आएगी,
कोई नहीं जानता बताने के लिए।
कुछ पल मिले थे ज़िंदगी में,
मोहब्बत से बिताने के लिए,
मगर कुछ लोग उन्हें भी बर्बाद कर गए,
नफ़रत निभाने के लिए।
न दौलत साथ जाएगी,
न शोहरत काम आएगी,
बस नेक कर्मों की खुशबू ही,
दुनिया को याद आएगी।
इसलिए जब तक साँसें हैं,
प्रेम का दीप जलाए रखना,
ज़िंदगी चंद दिनों का मेला है,
सबको गले लगाए रखना।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर