जख्म खाता रहा
दिल लगाता रहा....
1. कहीं वो हमसे हमारे ख्यालों में मिल जाये
बस अपनी ही गजल के शेर गुनगुनाता रहा ...
2. मालूम हमें था, उनकी जिन्दगी तो कोई और है
फिर भी अपनी जिन्दगी उन्ही पर लुटाता रहा...
3. जरा ये सोच कि गुजरती होगी उस गुलाब पर क्या
जो खुद टूटकर दो दिलो को मिलाता रहा....
4. जिसने लूट ली हमारी सांसे, हसरते, दिल ,दुनिया
मैं उसे अपने दिल का मालिक बताता रहा....
5. दोस्तों की दगाबाजियों से जब हम डरने लगे
दुश्मन को साथ लेकर किस्से सुनाता रहा....
6. कोई तो ले लेगा शायद टूटा हुआ दिल
वेबफाओं की बस्ती में दिल का बाजार लगाता रहा...
7. शायद कोई तो आकर रंग भर देगी "ऐ मुशाफिर"
उम्मीद लिए बेरंग तस्वीरें बनाता रहा .........
*जख्म खाता रहा .........
दिल लगाता रहा.........
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