बेटा कनाडा में।
गिन रहा डालर।।
बाप साईकिल चला।
भर रहा डगर।।
ये गांव की डगर।
वो कनाडा का डालर।।
ये डगर किस काम की।
वो डालर किस काम का।।
मैं भटक गया डगर।
अपने ही गांव की।।
बेटा खोज रहा डगर।
ऊंचे आसमान की।।
मैं ढूंढ रहा बेटा।
तेरी मां के आंचल।।
मां सिहर उठ बोली।
देखो मेरा भीगा आंचल।।
ढूंढो अपना बेटा।
मेरी आंखों के खारे पानी में।।
बेटा गिन रहा डालर।
कनाडा के आंगन में।।
बह गए ममता के मोती।
मां के आंचल में।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X