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ग़ज़ल : जलवा भी वही लेंगे फतवा भी वही देंगे

                
                                                         
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तुम देखना पुरानी वो चाल फिर चलेंगे
जिससे जिना करेंगे उसको ही सज़ा देंगे

इक बेतुकी रवायत ऊपर से उनकी फ़ितरत
तकलीफ़ भी वो देंगे, बदला भी वही लेंगे

वरना वो तुझको हँसके कमज़ोर ही करेंगे
उन पर ज़रूर हँसना जो आदतन हँसेंगे

जब आएगी मुसीबत टीवी के शहर वाले
झाँकेंगे खिड़कियों से घर से नहीं निकलेंगे

ये शेर क्या है प्यारे, सब भर्ती का सामान है
गर पाँच नहीं होंगे तो कैसे ये छपेंगे

वो ही हैं नूर वाले जो अक्ल के हैं अंधे
जलवा भी वही लेंगे फतवा भी वही देंगे

-संजय ग्रोवर
147-A, Pocket-A, Dilshad Garden, Delhi-110095


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7 वर्ष पहले

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