पढ़ लें
खोलें मन की गांठें अपनी
ऊँची मंजिल तक चढ़ लें
तोड़ के आओ सारे बंधन
हम भी तो कुछ पढ़ लें
मिले हमारा हक हमें भी
अपना भाग्य हम खुद गढ़ लें
कुछ भी ना रहे अछूता हमसे
आओ नभ तक हम चढ़ लें
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