ठण्डक आई, ठण्डक आई
देखो सबके बदन कंपाई
दिनकर खेले लुका-छिपाई
कुछ भी देता नहीं दिखाई
कोहरे ने की बहुत ढिठाई
कम पड़ने हैं लगे रजाई
मुन्नू का सीना जकड़ा है
चुन्नू को सर्दी पकड़ा है
बुढ़ऊ देखो कैसे सिकुड़े
गर्म ना कोई कपड़ा है
पशु-पक्षी सब व्याकुल हैं
गर्मी पाने को आकुल हैं
बुढ़िया ने है आग जलाई
बच्चे करते तपा-तपाई
प्यारे बच्चों बचकर रहना
मनमानी तुम कभी ना करना
देखो पूरे तन तुम ढकना
बाँधो मफलर, ओढ़ो साल
साथ में रखना शाल+दुशाल
ठण्डक ने ली है अंगड़ाई
बचकर करना लिखा-पढ़ाई
देखो सबके बदन कंपाई।
ठण्डक आई, ठण्डक आई
देखो सबके बदन कंपाई।।
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