सूरज दादा सुबह-सुबह तुम
कहाँ से, कैसे आते हो ?
सोते रहते हैं हम बच्चे,
पर तुम हमें जगा जाते हो ।
नींद पूरी न होने पाती,
अधकचरे में जगाते हो,
हमें बताओ सूरज दादा
बदले में क्या पाते हो ?
मम्मी रोज चिल्लाने लगती,
‘ उठ जा चुन्नू, सूरज निकला,
चल जल्दी से ब्रश कर ले,
होम वर्क करके दिखला ।।’
मीठा सपना टूट जाता, फिर–
चिंता वही-जाना स्कूल।
नहाना,धोना, टिफिन है रखना।
कोई चीज ना जाए भूल ।।
रहम करो दादा बच्चों पर
कुछ दिन तो तुम करो आराम।
छुट्टी हो, स्कूल न जायें, न–
करना पड़े यह नीरस काम ।।
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