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मेरे सारे पाप को हरना ।

                
                                                         
                            हे कृष्ण ! हे नटवर नागर !
                                                                 
                            
हे प्रभु ! तुम हो दया के सागर
इतनी दया तुम मुझपर करना
मेरे सारे पाप को हरना
बुद्धि नहीं है कुछ भी मुझमें
खोया रहता सदा ही तुझमें
इतनी विनती मेरी सुनना
रह जाये कोई अवगुण ना
इतना निर्मल मुझे बनाना
मन में अहं रहे कहीं ना
इतनी कृपा अबोध पर करना
चाह रहा यह भी भव तरना
सदा पुण्य हो इन हाथों से
कोई पाप ना हो जाए हमसे
हे मधुसूदन! दीनदयाला !
हे कृपासिंधु ! हे नंदलाल !
इतनी कृपा तुम मुझपर करना
मेरे सारे पाप को हरना ।
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45 मिनट पहले

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